लखीमपुर खीरी। परिषदीय विद्यालयों को मिलने वाली कंपोजिट ग्रांट के
खर्च में अब हेरफेर करना मुश्किल हो जाएगा। राज्य परियोजना निदेशक समग्र
शिक्षा ने कंपोजिट ग्रांट मद से खर्च का हिसाब पारदर्शी बनाने के लिए दीवार
पर पेंटिंग कराने के आदेश दिए हैं, जिस पर प्रत्येक वर्ष मिलने वाली
कंपोजिट ग्रांट के खर्च का ब्यौरा दर्ज कराना होगा।
इससे
पहले कुछ विद्यालयों में कंपोजिट ग्रांट का दुरुपयोग किए जाने के मामले
सामने आ चुके हैं। अब नए आदेश के बाद प्रधानाध्यापक की मनमानी पर अंकुश
लगना तय है। 2018-19 से समस्त परिषदीय विद्यालयों को कंपोजिट स्कूल ग्रांट
मद में धनराशि दी जा रही है, जिसमें छात्रों की संख्या के आधार पर पांच
श्रेणियों में वर्गीकृत करते हुए धनराशि दी जाती है। इससे काफी विद्यालयों
को 50 हजार से डेढ़ लाख रुपये तक धनराशि मिल रही है। इस धनराशि से
विद्यालयों में आवश्यक व्यवस्थाएं, रंग-रोगन आदि कार्य कराए जाने
प्रस्तावित हैं।
बीएसए बुद्ध प्रिय सिंह ने बताया कि प्रत्येक
विद्यालय भवन की दीवार पर पेंटिंग कर कंपोजिट स्कूल ग्रांट के मद में व्यय
होने वाली धनराशि का वर्षवार एवं मदवार विवरण अंकित किया जाएगा। पेंटिंग के
लिए ऐसी दीवार का चयन किया जाएगा, जो जनसामान्य को प्रथम दृष्टया दिखाई
पड़े। पेंटिंग का कार्य 1.8 मीटर (छह फुट) ऊंचा एवं 1.5 मीटर (पांच फुट)
चौड़ाई में किया जाएगा। भूमि से पेंटिंग की ऊंचाई कम से कम दो फुट रहेगी।
पेंटिंग के लिए चयनित दीवार की सतह को सीमेंट बेस्ड पुट्टी से समतल किया
जाएगा। इसके लिए बीईओ के माध्यम से सभी प्रधानाध्यापकों को निर्देश जारी
किए गए हैं।

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