सरकारी स्कूलों में पढ़ते हैं सिर्फ गरीब बच्चे : बोले बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री योगेश प्रताप सिंह
मंत्री बोले- सरकारी स्कूलों में पढ़ते हैं सिर्फ गरीब बच्चे
यूपी में अभी 1950 प्राइमरी स्कूलों की जरूरत
राज्यमंत्री ने कहा, संपन्न परिवारों के बच्चों के लिए है मांटेसरी स्कूल
सूबे के सरकारी प्राथमिक विद्यालयों में सिर्फ आर्थिक रूप से कमजोर बच्चे
ही पढ़ने जाते हैं। संपन्न परिवारों के बच्चों के लिए तो मांटेसरी स्कूल
हैं। ये बातें सोमवार को बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री योगेश प्रताप सिंह ने
राजधानी में पैक्स और विज्ञान फाउंडेशन की ओर से आयोजित विद्यालय प्रबंध
समितियों के जिलास्तरीय अधिवेशन में कही। इस तरह उन्होंने बता दिया कि
सरकार के संचालित प्राथमिक विद्यालयों में पढ़ाई का स्तर किस तरह गिर गया
है।
उन्होंने कहा कि गरीब बच्चों के लिए
स्कूलों को बेहतर बनाने की जिम्मेदारी सरकार की ही है। अगर इन स्कूलों को
यूं ही छोड़ दिया गया तो समाज में एक खाई पैदा हो जाएगी। यह खाई गरीब व
अमीर परिवार के बच्चों की शिक्षा के रूप में होगी, जो समाज के लिए खतरा
बनेगी। उन्होंने कहा, अमीर परिवार में जन्मा बच्चा ही बुद्धिमान नहीं होता
बल्कि गरीब परिवार को बच्चा भी होनहार होता है। लिहाजा मौके सबको मिलने
चाहिए। हालांकि स्कूलों की बदहाली के लिए उन्होंने केंद्र सरकार की नीतियों
को भी दोषी ठहराया। अधिवेशन में बीकेटी विधायक गोमती यादव, एडी बेसिक
महेंद्र सिंह राणा, पैक्स से नितेश मिश्रा, विज्ञान फाउंडेशन से संदीप खरे
मौजूद रहे।
विद्यालय
प्रबंध समितियों को मजबूत बनाने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। ये
समितियां गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, यूनिफार्म व मिड डे मील वितरण पर काम कर
रही है। चालू शैक्षिक सत्र में लखनऊ में 10 हजार से ज्यादा बच्चों का
नामांकन कराया गया।
राज्यमंत्री
ने बताया कि सूबे के 1.04 करोड़ बच्चे अभी स्कूल नहीं जा पा रहे। प्रदेश
में अभी भी 1950 प्राइमरी स्कूलों की कमी है। सभी स्कूलों में बिजली
कनेक्शन कराने व बालिकाओं के लिए शौचालय की व्यवस्था कराने की प्रक्रिया चल
रही है।
News Source- Amar Ujala
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