प्रदेश भर में बड़ी संख्या में राजकीय स्नातक शिक्षकों (एलटी ग्रेड पुरुष
संवर्ग) को अपने ही साथियों से जूनियर कर दिया गया है। यह काम एक, दो नहीं
बल्कि तीन-तीन बार हुआ है। एक संवर्ग को पदोन्नति न मिलने की वजह वरिष्ठता
सूची दुरुस्त न होना है। खास बात यह है कि वरिष्ठता सूची बनाने का जिम्मा
विभागीय अफसरों का है, लेकिन प्रमोशन न हो पाने का उसी संवर्ग के शिक्षकों
पर लगाया जा रहा है।
यह प्रकरण तूल पकड़ने पर नए
सिरे से वरिष्ठता सूची बनाने का आदेश हुआ है।
प्रदेश के राजकीय माध्यमिक
कालेजों में बीते वर्ष भर नियुक्ति और पदोन्नतियां हुई हैं। एलटी ग्रेड
महिला संवर्ग व प्रवक्ताओं का प्रमोशन रह-रहकर होता रहा। पहली बार 19
जनवरी, दूसरी बार 13 सितंबर एवं तीसरी बार 22 दिसंबर 2016 को विभागीय
पदोन्नति कमेटी की बैठक हुई। जिसमें बड़ी संख्या में शिक्षकों को प्रमोशन
मिला। इसमें एलटी ग्रेड पुरुष संवर्ग को दरकिनार किया गया, जबकि शिक्षा
निदेशक माध्यमिक ने संयुक्त शिक्षा निदेशकों को इस संबंध में कई बार
निर्देश जारी किए। सबसे अहम समस्या वरिष्ठता सूची की खामियां हैं, उन्हें
दुरुस्त करने की ओर किसी का ध्यान नहीं है। तीन वर्ष पहले 2013 में
पदोन्नति प्रक्रिया एकाएक रोकी गई थी। उस समय शिक्षकों की वरिष्ठता का
विवाद गहराने पर प्रकरण हाईकोर्ट तक पहुंचा था, लेकिन इस मामले में कोई भी
स्थगनादेश नहीं है, फिर भी प्रमोशन नहीं किए गए।
1इसी बीच राजकीय शिक्षक
संघ ने भी शासन को अफसरों की मनमानी से अवगत कराया। शासन ने भी एलटी ग्रेड
पुरुष संवर्ग को प्रमोशन देने का निर्देश दिया। पदोन्नति हुई, लेकिन एलटी
ग्रेड पुरुष संवर्ग को फिर दरकिनार कर दिया गया। प्रांतीय स्तर पर कोई
संशोधित नवीन ज्येष्ठता सूची का प्रकाशन अब तक नहीं किया गया है और न ही
शिक्षकों से कोई आपत्ति मांगी गई। सूची में बीच-बीच में ज्येष्ठता के
क्रमांक तक गायब हैं। अफसर पदोन्नतियां तीन साल रोकने का कारण तक नहीं बता
पा रहे हैं यह जरूर है कि अब ज्येष्ठता सूची नये सिरे से बनाने के निर्देश
हुए हैं। पिछले दिनों हुए प्रमोशन को अन्य संवर्ग की तरह एलटी ग्रेड पुरुष
संवर्ग की भी सभी मंडलों से गोपनीय आख्या मांगी थी। अफसरों ने उसे शिक्षा
निदेशालय भेजा, उसके बाद एकाएक पदोन्नति रोक देना शिक्षकों की समझ से परे
है। मा. शिक्षा के अपर शिक्षा निदेशक रमेश ने बताया कि शिक्षकों की डीपीसी
की नई तारीख तय हुई है और वरिष्ठता सूची भी बनाई जा रही है।
तीन
साल तक रोकी गई पदोन्नतियां
इस साल तीन बार प्रमोशन में
अनदेखी
अफसर तय करते वरिष्ठता सूची
देरी का जिम्मा
शिक्षकों पर डाला जा रहा
Dainik Jagran

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