तदर्थ शिक्षकों के विनियमितीकरण के दोहरे मानकों से इन शिक्षकों में
नाराजगी है। एक तरफ अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में 20 साल
से पढ़ारहे तदर्थ शिक्षकों को नियमित होने के लिए परीक्षा और साक्षात्कार
देना पड़ रहा है तो वहीं दूसरी तरफ राजकीय स्नातक एवं स्नातकोत्तर
महाविद्यालयों में महज तीन साल की सेवा देने वाले प्रवक्ताओं को स्थायी
करने के लिए प्रस्ताव मांगा जा रहा है।
सहायक
निदेशक उच्च शिक्षा डॉ. बीएल शर्मा ने 21 दिसंबर को सभी राजकीय
महाविद्यालयों के प्राचार्यों को पत्र लिखकर अगस्त 2020 तक स्थायीकरण के
लिए कितने प्रवक्ता बचे हैं इसकी सूचना मांगी है। यह भी पूछा है कि 2016 के
पूर्व से कार्यरत कितनेप्रवक्ता स्थायी होना शेष हैं। इस बीच सुप्रीम
कोर्ट के आदेश पर माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड तदर्थ शिक्षकों के लिए
टीजीटी-पीजीटी 2020 भर्ती में लिखित परीक्षा और साक्षात्कार का प्रावधान कर
रहा है।
30 दिसंबर 2000 के बाद नियुक्त तदर्थ
शिक्षकों की मांगी सूचनाः अपर निदेशक माध्यमिक डॉ. महेन्द्र देव ने मंडलीय
संयुक्त शिक्षा निदेशकों और जिला विद्यालय निरीक्षकों से 30 दिसंबर 2000 के
बाद नियुक्त तदर्थ शिक्षकों की सूचना उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।

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